जब साधु भगवंत का काल धर्म होता है तब जय जय नंदा जय जय भद्दा क्यों बोलते हैं???




जय जय नंदा..
जय जय भद्दा..

1) इन शब्दों का अर्थ क्या है ?

2) क्यों किसी भी पांच महाव्रतधारी और अष्ट प्रवचन माता के पालनकर्ता के कालधर्म अवसर पर इन्हें बोला जाता है ???**

१) इन शब्दों का अर्थ  म. सा. से पूछने पर समजाया गया था, वह यह है...

यह शब्द भगवान के सभी कल्याणक के अवसर पर देवताओ द्वारा बोले जाते रहे है, जिसके भाव यह है, कि,

"हे प्रभु ! आपके कल्याणको के कारण लोग़ों को, यावत्, नरक के जीवों को भी जो नंदा-नंद आनंद हुआ, और उनका जो भद्दा-भद्र कल्याण हुआ, उस-उस आनंद का जय हो, एवम् उस-उस कल्याण का जय हो",

अर्थात्,

"वह आनंद और कल्याण चिरंजिवी रहे, यानि, लोक में अनुभव होते रहें, लोग़ इन्हें अनुभव करते रहें" ।

२) इसीलिए, वर्तमान काल में परमात्मा प्रभु की सदेह अनुपस्थिति में, किसी भी पांच महाव्रतधारी के कालधर्म अवसर पर भी हम यही शब्द इसी प्रेरणा को झिलने के भाव से बोलते है, कि, महात्मा ने अपने चारित्रजीवन में ज्ञानगंगा जिनवाणी आगे बहाकर, प्रभुकी आज्ञा का, अपने उद्धार हेतु व् औरों को भी तारने हेतु, जो  पालन किया है, वह भी आनंददायी और कल्याणदायी है, और यही आनंद व् कल्याण आगे भी सब अनुभव करते रहें, वह आनंद और कल्याण  चिरंजिवी हो, इसीलिये यही भाव महात्माओं के कालधर्म पर हम यह शब्द बोलकर उज़ागर करते है!






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